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mahabharat 13.2.81: पुरुषोत्तम! तीनों लोकों में किसी में इतनी शक्ति नहीं है कि वह आपकी पतिव्रता पत्नी की ओर अशुद्ध विचार से देख भी सके। ॥81॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  13.2.81 
न चास्ति शक्तिस्त्रैलोक्ये कस्यचित् पुरुषोत्तम।
पतिव्रतामिमां साध्वीं तवोद्वीक्षितुमप्युत॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम! तीनों लोकों में किसी में इतनी शक्ति नहीं है कि वह आपकी पतिव्रता पत्नी की ओर अशुद्ध विचार से देख भी सके। ॥81॥
 
Purushottam! Nobody in the three worlds has the power to even look at your virtuous and faithful wife with impure thoughts.' ॥ 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)