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mahabharat 13.2.8: वह राजा इस पृथ्वी पर मदिराश्व नाम से विख्यात था और सदैव वेद तथा धनुर्वेद के अभ्यास में लगा रहता था ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.2.8 
मदिराश्व इति ख्यात: पृथिव्यां पृथिवीपति:।
धनुर्वेदे च वेदे च निरतो योऽभवत् सदा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह राजा इस पृथ्वी पर मदिराश्व नाम से विख्यात था और सदैव वेद तथा धनुर्वेद के अभ्यास में लगा रहता था ॥8॥
 
That king was famous on this earth by the name of Madirashva and was always engaged in the practice of Vedas and Dhanurveda. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)