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mahabharat 13.2.79: हे भोले सुदर्शन! तुम्हारा कल्याण हो। मैं धर्म हूँ और तुम्हारी परीक्षा लेने आया हूँ। यह जानकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई कि तुम्हारे पास सत्य है। 79।   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  13.2.79 
धर्मोऽहमस्मि भद्रं ते जिज्ञासार्थं तवानघ।
प्राप्त: सत्यं च ते ज्ञात्वा प्रीतिर्मे परमा त्वयि॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
हे भोले सुदर्शन! तुम्हारा कल्याण हो। मैं धर्म हूँ और तुम्हारी परीक्षा लेने आया हूँ। यह जानकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई कि तुम्हारे पास सत्य है। 79।
 
Innocent Sudarshan! May you be blessed. I am Dharma and have come here to test you. I am very pleased to know that you have the truth. 79.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)