Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.2.77: तत्पश्चात् वह ब्राह्मण उस आश्रम से बाहर आया और वायु के समान अपने शरीर से पृथ्वी और आकाश को फैलाकर स्थित हो गया ॥77॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  13.2.77 
उटजात् तु ततस्तस्मान्निश्चक्राम स वै द्विज:।
वपुषा द्यां च भूमिं च व्याप्य वायुरिवोद्यत:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह ब्राह्मण उस आश्रम से बाहर आया और वायु के समान अपने शरीर से पृथ्वी और आकाश को फैलाकर स्थित हो गया ॥77॥
 
After that the Brahmin came out of that ashram. Like air, he spread the earth and the sky with his body and became situated. 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)