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mahabharat 13.2.76: भरतनन्दन! सुदर्शन के ऐसा कहते ही चारों ओर से बार-बार यह वाणी आने लगी- 'आप जो कह रहे हैं वह सत्य है। इसमें मिथ्यात्व का लेशमात्र भी नहीं है।'॥76॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  13.2.76 
ततो नाद: समभवद् दिक्षु सर्वासु भारत।
असकृत् सत्यमित्येवं नैतन्मिथ्येति सर्वत:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! सुदर्शन के ऐसा कहते ही चारों ओर से बार-बार यह वाणी आने लगी- 'आप जो कह रहे हैं वह सत्य है। इसमें मिथ्यात्व का लेशमात्र भी नहीं है।'॥76॥
 
Bharatanandan! As soon as Sudarshan said this, a voice started coming from all directions repeatedly-'What you are saying is true. There is not even a trace of falsehood in it.'॥ 76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)