Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.2.73-74: हे धर्मात्माओं में श्रेष्ठ ब्राह्मण! पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, नेत्र, बुद्धि, प्राण, मन, काल और दिशाएँ - ये दस गुण (वस्तुएँ) प्राणियों के शरीर में सदैव निवास करते हैं और उनके पुण्य-पाप कर्मों का निरीक्षण करते हैं। 73-74॥ | mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे धर्मात्माओं में श्रेष्ठ ब्राह्मण! पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, नेत्र, बुद्धि, प्राण, मन, काल और दिशाएँ - ये दस गुण (वस्तुएँ) प्राणियों के शरीर में सदैव निवास करते हैं और उनके पुण्य-पाप कर्मों का निरीक्षण करते हैं। 73-74॥
The best Brahmin among the righteous! Earth, air, sky, water, eyes, intellect, soul, mind, time and directions – these ten qualities (objects) always reside in the bodies of living beings and observe their virtuous and sinful deeds. 73-74॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥