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mahabharat 13.2.71: मैंने अपने जीवन, अपनी पत्नी और अपनी सारी सम्पत्ति को अतिथियों के लिए त्यागने की प्रतिज्ञा की है।' 71   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  13.2.71 
प्राणा हि मम दाराश्च यच्चान्यद् विद्यते वसु।
अतिथिभ्यो मया देयमिति मे व्रतमाहितम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
मैंने अपने जीवन, अपनी पत्नी और अपनी सारी सम्पत्ति को अतिथियों के लिए त्यागने की प्रतिज्ञा की है।' 71
 
I have vowed to sacrifice my life, my wife, and whatever wealth I have for the guests.' 71
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)