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mahabharat 13.2.70: जिस गृहस्थ के घर कोई अतिथि आता है और उसका आदर करके चला जाता है, उसके लिए उससे बड़ा कोई धर्म नहीं है - ऐसा बुद्धिमान पुरुष कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  13.2.70 
अतिथि: पूजितो यस्य गृहस्थस्य तु गच्छति।
नान्यस्तस्मात् परो धर्म इति प्राहुर्मनीषिण:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
जिस गृहस्थ के घर कोई अतिथि आता है और उसका आदर करके चला जाता है, उसके लिए उससे बड़ा कोई धर्म नहीं है - ऐसा बुद्धिमान पुरुष कहते हैं।
 
For a householder in whose house a guest comes and leaves after being respected, there is no greater religion than that - so say the wise men.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)