Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.2.69: हे ब्राह्मण! तुम्हारा मुख कामनाओं से परिपूर्ण हो। मैं इससे बहुत प्रसन्न हूँ; क्योंकि घर में आये हुए अतिथियों का पूजन करना गृहस्थ का सबसे बड़ा कर्तव्य है। | mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मण! तुम्हारा मुख कामनाओं से परिपूर्ण हो। मैं इससे बहुत प्रसन्न हूँ; क्योंकि घर में आये हुए अतिथियों का पूजन करना गृहस्थ का सबसे बड़ा कर्तव्य है।
O Brahmin! May your face be full of desires. I am very happy with this; because worshipping the guests who come to the house is the greatest duty for a householder. 69.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥