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श्लोक  13.2.65 
अनया छन्द्यमानोऽहं भार्यया तव सत्तम।
तैस्तैरतिथिसत्कारैर्ब्रह्मन्नेषा वृता मया॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
साधुशिरोमणि! आपकी इस पत्नी ने आतिथ्य द्वारा मेरी इच्छा पूर्ण करने का वचन दिया है। ब्रह्मन्! अतः मैंने इसका वरण किया है।
 
Sadhushiromane! This wife of yours has promised to fulfill my wish by hospitality. Brahman! Then I have chosen her. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)