Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.2.62-63: अब सुदर्शन बार-बार पुकारकर कहने लगा- 'मेरी पतिव्रता स्त्री कहाँ है? वह सुशीला कहाँ चली गई? मेरी सेवा से बढ़कर उसे और कौन-सा कार्य पड़ा है? वह पतिव्रता है, सत्य बोलती है और सदा सरल स्वभाव वाली है। आज वह पहले की भाँति हँसकर मेरा स्वागत क्यों नहीं कर रही है?'॥62-63॥ | mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ तां पुनरेवेदं प्रोवाच स सुदर्शन:।
क्व सा साध्वी क्व सा याता गरीय: किमतो मम॥ ६२॥
पतिव्रता सत्यशीला नित्यं चैवार्जवे रता।
कथं न प्रत्युदेत्यद्य स्मयमाना यथा पुरा॥ ६३॥
अनुवाद
अब सुदर्शन बार-बार पुकारकर कहने लगा- 'मेरी पतिव्रता स्त्री कहाँ है? वह सुशीला कहाँ चली गई? मेरी सेवा से बढ़कर उसे और कौन-सा कार्य पड़ा है? वह पतिव्रता है, सत्य बोलती है और सदा सरल स्वभाव वाली है। आज वह पहले की भाँति हँसकर मेरा स्वागत क्यों नहीं कर रही है?'॥62-63॥
Now Sudarshan started calling out again and again and said- 'Where is my pious wife? Where has that Sushila gone? What more important task has befallen her than serving me. She is faithful to her husband, speaks the truth and is always simple-natured. Why is she not welcoming me smilingly today like before?'॥ 62-63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥