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mahabharat 13.2.57: अपने पति की कही बात याद करके, जो गृहस्थ धर्म का पालन करना चाहते थे, जब उन्होंने ब्राह्मण की बात मान ली, तो ब्राह्मण ऋषि मुस्कुराये और ओघवती के साथ घर में प्रवेश किया।   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.2.57 
ततो विहस्य विप्रर्षि: सा चैवाथ विवेश ह।
संस्मृत्य भर्तुर्वचनं गृहस्थाश्रमकाङ्क्षिण:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
अपने पति की कही बात याद करके, जो गृहस्थ धर्म का पालन करना चाहते थे, जब उन्होंने ब्राह्मण की बात मान ली, तो ब्राह्मण ऋषि मुस्कुराये और ओघवती के साथ घर में प्रवेश किया।
 
Remembering what her husband had said, who desired to follow the duties of a householder, when she said yes to the Brahmin, the Brahmin sage smiled and entered the house with Oghavati.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)