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mahabharat 13.2.56: तब राजकुमारी ने अपने पति के पूर्व वचनों को स्मरण करके लज्जित होकर उस श्रेष्ठ ब्राह्मण से कहा, 'ठीक है, मैं आपकी आज्ञा स्वीकार करती हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  13.2.56 
सा तु राजसुता स्मृत्वा भर्तुर्वचनमादित:।
तथेति लज्जमाना सा तमुवाच द्विजर्षभम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
तब राजकुमारी ने अपने पति के पूर्व वचनों को स्मरण करके लज्जित होकर उस श्रेष्ठ ब्राह्मण से कहा, 'ठीक है, मैं आपकी आज्ञा स्वीकार करती हूँ।'
 
Then the princess, remembering her husband's words earlier, said shyly to that great Brahmin, 'Okay, I accept your command.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)