Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.2.55: राजकुमारी ने अतिथि से अन्य कोई भी इच्छित वस्तु माँगने का बार-बार अनुरोध किया, परंतु ब्राह्मण ने अपने शरीर के दान के अतिरिक्त अन्य कोई वस्तु नहीं माँगी ॥55॥ | mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तया छन्द्यमानोऽन्यैरीप्सितैर्नृपकन्यया।
नान्यमात्मप्रदानात् स तस्या वव्रे वरं द्विज:॥ ५५॥
अनुवाद
राजकुमारी ने अतिथि से अन्य कोई भी इच्छित वस्तु माँगने का बार-बार अनुरोध किया, परंतु ब्राह्मण ने अपने शरीर के दान के अतिरिक्त अन्य कोई वस्तु नहीं माँगी ॥55॥
The princess repeatedly requested the guest to ask for any other desired thing, but the brahmin did not ask for any other thing except the donation of his body. ॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥