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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  13.2.53 
तामब्रवीत् ततो विप्रो राजपुत्रीं सुदर्शनाम्।
त्वया ममार्थ: कल्याणि निर्विशङ्कैतदाचर॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
तब ब्राह्मण ने सुन्दर राजकुमारी ओघवती से कहा, "कल्याणी! मैं केवल तुम्हें चाहता हूँ। मेरा यह कार्य बिना किसी संकोच के करो।"
 
Then the Brahmin said to the beautiful princess Oghavati, 'Kalyani! I want only you. Do this work of mine without any hesitation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)