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mahabharat 13.2.42: राजा ! अग्निकुमार सुदर्शन ने ओघवती से कहा - 'देवि ! अतिथि के विरुद्ध कुछ भी नहीं करना चाहिए ।' ॥42॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  13.2.42 
तामथौघवतीं राजन् स पावकसुतोऽब्रवीत्।
अतिथे: प्रतिकूलं ते न कर्तव्यं कथंचन॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
राजा ! अग्निकुमार सुदर्शन ने ओघवती से कहा - 'देवि ! अतिथि के विरुद्ध कुछ भी नहीं करना चाहिए ।' ॥42॥
 
King! Agnikumar Sudarshan said to Oghavati - 'Devi! You should not do anything against a guest.' ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)