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mahabharat 13.2.4: भीष्म बोले, 'हे राजन! एक प्राचीन कथा का उदाहरण दिया गया है कि किस प्रकार एक गृहस्थ ने धर्म का आश्रय लेकर मृत्यु को जीत लिया।' ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.2.4 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
यथा मृत्युर्गृहस्थेन धर्ममाश्रित्य निर्जित:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, 'हे राजन! एक प्राचीन कथा का उदाहरण दिया गया है कि किस प्रकार एक गृहस्थ ने धर्म का आश्रय लेकर मृत्यु को जीत लिया।' ॥4॥
 
Bhishma said, 'O King! An example from an ancient story is given about how a householder conquered death by taking refuge in Dharma.' ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)