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mahabharat 13.2.35-36h: सुदर्शनाकी सुन्दरता, शील, वंश, शरीरकी बनावट और कान्ति देखकर अग्निदेव बहुत प्रसन्न हुए और उसे गर्भवती करनेका विचार किया ॥35 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  13.2.35-36h 
तस्या रूपेण शीलेन कुलेन वपुषा श्रिया॥ ३५॥
अभवत् प्रीतिमानग्निर्गर्भे चास्या मनो दधे।
 
 
अनुवाद
सुदर्शनाकी सुन्दरता, शील, वंश, शरीरकी बनावट और कान्ति देखकर अग्निदेव बहुत प्रसन्न हुए और उसे गर्भवती करनेका विचार किया ॥35 1/2॥
 
Seeing Sudarshana's beauty, modesty, lineage, body shape and radiance, Agnidev was very pleased and thought of impregnating her. 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)