Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.2.33-34h: दक्षिण दिशा पर विजय प्राप्त करते समय सहदेव ने अग्निदेव के साक्षात् दर्शन किए थे। जब अग्निदेव वहाँ रहने को तैयार हो गए, तब राजा दुर्योधन ने अपनी पुत्री को सुन्दर वस्त्र पहनाकर, नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित करके महाबली अग्निदेव को सौंप दिया। | mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृष्टं हि सहदेवेन दिशं विजयता तदा।
ततस्तां समलंकृत्य कन्यामाहृतवाससम्॥ ३३॥
ददौ दुर्योधनो राजा पावकाय महात्मने।
अनुवाद
दक्षिण दिशा पर विजय प्राप्त करते समय सहदेव ने अग्निदेव के साक्षात् दर्शन किए थे। जब अग्निदेव वहाँ रहने को तैयार हो गए, तब राजा दुर्योधन ने अपनी पुत्री को सुन्दर वस्त्र पहनाकर, नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित करके महाबली अग्निदेव को सौंप दिया।
Sahadeva had seen Agnidev personally while conquering the southern direction. When Agnidev agreed to stay there, King Duryodhana dressed his daughter in beautiful clothes and adorned her with various ornaments and handed her over to the great Agni. 33 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥