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mahabharat 13.2.31: तत्पश्चात् उन्होंने पुत्रीरूपी भगवान अग्निदेव से प्रार्थना की - 'चित्रभानो! आप सदैव इसी नगर में निवास करें।' ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.2.31 
अयाचत च तं शुल्कं भगवन्तं विभावसुम्।
नित्यं सांनिध्यमिह ते चित्रभानो भवेदिति॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने पुत्रीरूपी भगवान अग्निदेव से प्रार्थना की - 'चित्रभानो! आप सदैव इसी नगर में निवास करें।' ॥31॥
 
Thereafter he prayed to Lord Agni in the form of the daughter as fee - 'Chitrabhano! May you always reside in this city.' ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)