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mahabharat 13.2.30: ब्रह्मवादी ऋषियों के ये वचन सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन बुद्धिमान ऋषियों ने ‘तथास्तु’ कहकर अग्निदेव का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.2.30 
तत: स राजा तत् श्रुत्वा वचनं ब्रह्मवादिनाम्।
अवाप्य परमं हर्षं तथेति प्राह बुद्धिमान्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मवादी ऋषियों के ये वचन सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन बुद्धिमान ऋषियों ने ‘तथास्तु’ कहकर अग्निदेव का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया ॥30॥
 
The king was very happy to hear these words of Brahmavadi sages and those wise sages accepted the proposal of Agnidev by saying 'Athastu'. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)