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mahabharat 13.2.24: हे श्रेष्ठ ब्राह्मणों! मैंने या आपने ऐसा कौन सा पाप कर्म किया है जिसके कारण दुष्ट मनुष्यों के उपकार के समान अग्निदेव भी नष्ट हो गए हैं?   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.2.24 
दुष्कृतं मम किं नु स्याद् भवतां वा द्विजर्षभा:।
येन नाशं जगामाग्नि: कृतं कुपुरुषेष्विव॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मणों! मैंने या आपने ऐसा कौन सा पाप कर्म किया है जिसके कारण दुष्ट मनुष्यों के उपकार के समान अग्निदेव भी नष्ट हो गए हैं?
 
O great Brahmins! What evil deed have I or you committed due to which the God of Fire has been destroyed just like the favors done to evil men? 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)