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mahabharat 13.2.17: राजा दुर्योधन वेदों का मर्मज्ञ विद्वान, यज्ञकर्ता, बुद्धिमान, बुद्धिमान, ब्राह्मणभक्त और सत्यप्रतिज्ञ था। वह सबको दान देता था और किसी का अपमान नहीं करता था। 17॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.2.17 
यज्वा च दान्तो मेधावी ब्रह्मण्य: सत्यसङ्गर:।
न चावमन्ता दाता च वेदवेदाङ्गपारग:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजा दुर्योधन वेदों का मर्मज्ञ विद्वान, यज्ञकर्ता, बुद्धिमान, बुद्धिमान, ब्राह्मणभक्त और सत्यप्रतिज्ञ था। वह सबको दान देता था और किसी का अपमान नहीं करता था। 17॥
 
King Duryodhana was a well-versed scholar of the Vedas, a Yagya-performer, an intelligent person, intelligent, a Brahmin devotee and a pledge of truth. He gave charity to everyone and did not insult anyone. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)