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mahabharat 13.2.16: वह राजा बड़ा उदार, मृदुभाषी, किसी के दोष न देखने वाला, बुद्धिमान, धार्मिक, दयालु और वीर था। वह कभी अपनी प्रशंसा नहीं करता था ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.2.16 
सुदक्षिणो मधुरवागनसूयुर्जितेन्द्रिय:।
धर्मात्मा चानृशंसश्च विक्रान्तोऽथाविकत्थन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वह राजा बड़ा उदार, मृदुभाषी, किसी के दोष न देखने वाला, बुद्धिमान, धार्मिक, दयालु और वीर था। वह कभी अपनी प्रशंसा नहीं करता था ॥16॥
 
That king was very generous, soft-spoken, never seeing anyone's faults, intelligent, religious, kind and brave. He never praised himself. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)