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mahabharat 13.2.15-16h: उसके राज्य में कोई भी कंजूस, दुखी, बीमार या कमजोर व्यक्ति नजर नहीं आता था।   |   mahabharat अध्याय 13.2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  13.2.15-16h 
न तस्य विषये चाभूत् कृपणो नापि दुर्गत:॥ १५॥
व्याधितो वा कृशो वापि तस्मिन् नाभून्नर: क्वचित् ।
 
 
अनुवाद
उसके राज्य में कोई भी कंजूस, दुखी, बीमार या कमजोर व्यक्ति नजर नहीं आता था।
 
In his kingdom there was no miserly, miserable, sick or weak person to be seen. 15 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)