Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.19.26: कुन्तीनन्दन! उनके यह वाक्य समाप्त होते ही मैं क्रूर पशु हो गया। तब मैं भगवान शंकर की शरण में गया। योगी महेश्वर ने अपनी शरण में आए हुए मुझ से इस प्रकार कहा-॥26॥ | mahabharat अध्याय 13.19: शिवसहस्रनामके पाठकी महिमा तथा ऋषियोंका भगवान् शंकरकी कृपासे अभीष्ट सिद्धि होनेके विषयमें अपना-अपना अनुभव सुनाना और श्रीकृष्णके द्वारा भगवान् शिवजीकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुन्तीनन्दन! उनके यह वाक्य समाप्त होते ही मैं क्रूर पशु हो गया। तब मैं भगवान शंकर की शरण में गया। योगी महेश्वर ने अपनी शरण में आए हुए मुझ से इस प्रकार कहा-॥26॥
Kuntinandan! As soon as he finished this sentence, I became a cruel animal. Then I went to the refuge of Lord Shankar. Yogi Maheshwar spoke to me, who had come to his refuge, in this manner -॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥