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mahabharat 13.189.6-7h: भीष्म ने अपने शरीर के सभी द्वार बंद कर लिए थे और अपने प्राणों को सब ओर से अवरुद्ध कर लिया था; इसलिए वे अपना सिर (ब्रह्मरंध्र) तोड़कर आकाश में चले गए।   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  13.189.6-7h 
संनिरुद्धस्तु तेनात्मा सर्वेष्वायतनेषु च॥ ६॥
जगाम भित्त्वा मूर्धानं दिवमभ्युत्पपात ह।
 
 
अनुवाद
भीष्म ने अपने शरीर के सभी द्वार बंद कर लिए थे और अपने प्राणों को सब ओर से अवरुद्ध कर लिया था; इसलिए वे अपना सिर (ब्रह्मरंध्र) तोड़कर आकाश में चले गए।
 
Bhishma had shut all the doors of his body and blocked his life from all sides; therefore he broke his head (Brahmarandhra) and went into the sky. 6 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)