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mahabharat 13.189.5-6h: नरेश्वर! इस प्रकार सबके देखते-देखते भीष्मजी का शरीर क्षण भर में बाणों से रहित हो गया। यह देखकर व्यास आदि समस्त ऋषियों सहित भगवान श्रीकृष्ण को बड़ा आश्चर्य हुआ।   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  13.189.5-6h 
क्षणेन प्रेक्षतां तेषां विशल्य: सोऽभवत् तदा।
तद् दृष्ट्वा विस्मिता: सर्वे वासुदेवपुरोगमा:॥ ५॥
सह तैर्मुनिभि: सर्वैस्तदा व्यासादिभिर्नृप।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! इस प्रकार सबके देखते-देखते भीष्मजी का शरीर क्षण भर में बाणों से रहित हो गया। यह देखकर व्यास आदि समस्त ऋषियों सहित भगवान श्रीकृष्ण को बड़ा आश्चर्य हुआ।
 
Nareshwar! In this way, in front of everyone, Bhishmaji's body became free of arrows in a moment. Seeing this, Lord Shri Krishna along with all the sages like Vyas were greatly astonished. 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)