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mahabharat 13.189.36: वैशम्पायन कहते हैं - महाराज! जब भगवान श्रीकृष्ण और व्यास जी ने इस प्रकार समझाया, तब नदियों में श्रेष्ठ गंगाजी अपना शोक त्यागकर पुनः अपने जल में चली गईं।   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.189.36 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्ता सा तु कृष्णेन व्यासेन तु सरिद्वरा।
त्यक्त्वा शोकं महाराज स्वं वार्यवततार ह॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - महाराज! जब भगवान श्रीकृष्ण और व्यास जी ने इस प्रकार समझाया, तब नदियों में श्रेष्ठ गंगाजी अपना शोक त्यागकर पुनः अपने जल में चली गईं।
 
Vaishmpayana says - Maharaj! When Lord Krishna and Vyasa explained in this manner, then the best of the rivers, Ganga, gave up her grief and went back into her water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)