Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.189.33-34: शुभान्ने! जब कौरवों में श्रेष्ठ आपके पुत्र भीष्म ने धनुष-बाण हाथ में लिया था, तब युद्ध में इन्द्र भी उन्हें नहीं मार सके थे। वे अपनी इच्छा से ही शरीर त्यागकर स्वर्ग चले गए हैं। 33-34॥ | mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्मं हि कुरुशार्दूलमुद्यतेषुं महारणे॥ ३३॥
न शक्त: संयुगे हन्तुं साक्षादपि शतक्रतु:।
स्वच्छन्दतस्तव सुतो गत: स्वर्गं शुभानने॥ ३४॥
अनुवाद
शुभान्ने! जब कौरवों में श्रेष्ठ आपके पुत्र भीष्म ने धनुष-बाण हाथ में लिया था, तब युद्ध में इन्द्र भी उन्हें नहीं मार सके थे। वे अपनी इच्छा से ही शरीर त्यागकर स्वर्ग चले गए हैं। 33-34॥
Shubhanane! When your son Bhishma, the best of Kurus, held bow and arrow in his hand, even Indra could not kill him in battle. He has left his body and gone to heaven of his own free will. 33-34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥