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mahabharat 13.189.3-4: प्रभु! उस समय वहाँ एकत्रित समस्त ऋषि-मुनियों में एक बड़ी आश्चर्यजनक घटना घटी। व्यासजी सहित सभी महर्षियों ने देखा कि जब भी योग में लीन शान्तनु नन्दन भीष्म के प्राण उनके शरीर के अंगों को छोड़कर ऊपर उठते थे, तो उस अंग से लगे बाण स्वतः ही निकल जाते थे और उनके घाव भर जाते थे।   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  13.189.3-4 
इदमाश्चर्यमासीच्च मध्ये तेषां महात्मनाम्।
सहितैर्ऋषिभि: सर्वैस्तदा व्यासादिभि: प्रभो॥ ३॥
यद्यन्मुञ्चति गात्रं हि स शान्तनुसुतस्तदा।
तत् तद् विशल्यं भवति योगयुक्तस्य तस्य वै॥ ४॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! उस समय वहाँ एकत्रित समस्त ऋषि-मुनियों में एक बड़ी आश्चर्यजनक घटना घटी। व्यासजी सहित सभी महर्षियों ने देखा कि जब भी योग में लीन शान्तनु नन्दन भीष्म के प्राण उनके शरीर के अंगों को छोड़कर ऊपर उठते थे, तो उस अंग से लगे बाण स्वतः ही निकल जाते थे और उनके घाव भर जाते थे।
 
Prabhu! At that time a very surprising event took place among all the saints and sages gathered there. All the great sages including Vyas saw that whenever the soul of Shantanu Nandan Bhishma, who was absorbed in yoga, left his body parts and rose up, the arrows from that body parts would automatically come out and his wounds would heal. 3-4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)