Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.189.29-30h: जब महानदी गंगाजी ऐसी बातें कहकर विलाप करने लगीं, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा -॥29 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  13.189.29-30h 
एवंविधं बहु तदा विलपन्तीं महानदीम्॥ २९॥
आश्वासयामास तदा गङ्गां दामोदरो विभु:।
 
 
अनुवाद
जब महानदी गंगाजी ऐसी बातें कहकर विलाप करने लगीं, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा -॥29 1/2॥
 
When the great river Ganga started lamenting after saying such things, then Lord Krishna reassured her and said -॥ 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)