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mahabharat 13.189.28-29h: यह बहुत दुःख की बात है कि जिस महान योद्धा ने कुरुक्षेत्र के युद्ध में जमदग्नि के पुत्र परशुराम को अनावश्यक रूप से कष्ट दिया था, वह शिखंडी के हाथों मारा गया।' 28 1/2   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  13.189.28-29h 
जामदग्न्य: कुरुक्षेत्रे युधि येन महात्मना॥ २८॥
पीडितो नातियत्नेन स हतोऽद्य शिखण्डिना।
 
 
अनुवाद
यह बहुत दुःख की बात है कि जिस महान योद्धा ने कुरुक्षेत्र के युद्ध में जमदग्नि के पुत्र परशुराम को अनावश्यक रूप से कष्ट दिया था, वह शिखंडी के हाथों मारा गया।' 28 1/2
 
It is very sad that the great warrior who had unnecessarily troubled Jamdagni's son Parashurama in the battle of Kurukshetra was killed by Shikhandi.' 28 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)