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mahabharat 13.189.27-28h: हाय! आज यह सुनकर मेरा हृदय क्यों नहीं टूटता कि इस पृथ्वी पर जिसकी कोई बराबरी का बल नहीं है, वह शिखण्डी के द्वारा मारा गया?॥27 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  13.189.27-28h 
यस्य नास्ति बले तुल्य: पृथिव्यामपि कश्चन॥ २७॥
हतं शिखण्डिना श्रुत्वा न विदीर्येत यन्मन:।
 
 
अनुवाद
हाय! आज यह सुनकर मेरा हृदय क्यों नहीं टूटता कि इस पृथ्वी पर जिसकी कोई बराबरी का बल नहीं है, वह शिखण्डी के द्वारा मारा गया?॥27 1/2॥
 
Alas! Why doesn't my heart break today on hearing that the one who has no equal in strength on this earth was killed by Shikhandi?॥ 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)