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mahabharat 13.189.18-21h: इस प्रकार कौरवों में श्रेष्ठ भीष्म का दाह-संस्कार करके, सभी कौरव अपनी स्त्रियों सहित ऋषियों द्वारा सेवित परम पवित्र भागीरथी के तट पर गए। महर्षि व्यास, देवर्षि नारद, असित, भगवान श्रीकृष्ण और नगरवासी भी उनके साथ आए। वहाँ पहुँचकर उन क्षत्रिय सरदारों और अन्य सभी लोगों ने महात्मा भीष्म का विधिपूर्वक सत्कार किया। 18-20 1/2   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 18-21h
 
 
श्लोक  13.189.18-21h 
संस्कृत्य च कुरुश्रेष्ठं गाङ्गेयं कुरुसत्तमा:॥ १८॥
जग्मुर्भागीरथीं पुण्यामृषिजुष्टां कुरूद्वहा:।
अनुगम्यमाना व्यासेन नारदेनासितेन च॥ १९॥
कृष्णेन भरतस्त्रीभिर्ये च पौरा: समागता:।
उदकं चक्रिरे चैव गाङ्गेयस्य महात्मन:॥ २०॥
विधिवत् क्षत्रियश्रेष्ठा: स च सर्वो जनस्तदा।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कौरवों में श्रेष्ठ भीष्म का दाह-संस्कार करके, सभी कौरव अपनी स्त्रियों सहित ऋषियों द्वारा सेवित परम पवित्र भागीरथी के तट पर गए। महर्षि व्यास, देवर्षि नारद, असित, भगवान श्रीकृष्ण और नगरवासी भी उनके साथ आए। वहाँ पहुँचकर उन क्षत्रिय सरदारों और अन्य सभी लोगों ने महात्मा भीष्म का विधिपूर्वक सत्कार किया। 18-20 1/2
 
Thus, after cremating Bhishma, the best of the Kurus, all the Kauravas along with their women went to the banks of the most holy Bhagirathi, served by the sages. Maharishi Vyas, Devarshi Narad, Asit, Lord Shri Krishna and city residents also came with him. After reaching there, those Kshatriya leaders and all the other people ritually paid homage to Mahatma Bhishma. 18-20 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)