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mahabharat 13.189.12: राजा युधिष्ठिर और परम बुद्धिमान विदुर दोनों ने कुरुनन्दन गंगापुत्र भीष्म को रेशमी वस्त्र और मालाओं से ढककर चिता पर सुला दिया॥12॥   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.189.12 
युधिष्ठिरश्च गाङ्गेयं विदुरश्च महामति:।
छादयामासतुरुभौ क्षौमैर्माल्यैश्च कौरवम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजा युधिष्ठिर और परम बुद्धिमान विदुर दोनों ने कुरुनन्दन गंगापुत्र भीष्म को रेशमी वस्त्र और मालाओं से ढककर चिता पर सुला दिया॥12॥
 
King Yudhishthir and the most intelligent Vidur both covered Bhishma, the son of Kurunandan Ganga, with silk clothes and garlands and made him sleep on the pyre. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)