श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.189.1 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा कुरून् सर्वान् भीष्म: शान्तनवस्तदा।
तूष्णीं बभूव कौरव्य: स मुहूर्तमरिंदम॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे शत्रु जनमेजय! समस्त कौरवों से ऐसा कहकर कौरवश्रेष्ठ भीष्म दो घड़ी तक मौन रहे॥1॥
 
Vaishampayanji says - Enemy Janamejaya! Having said this to all the Kauravas, Bhishma, the best of Kurus, remained silent for two hours. 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas