Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.188.34: धर्मराज युधिष्ठिर का हृदय अत्यंत पवित्र है। वे सदैव आपकी आज्ञा में रहेंगे। मैं जानता हूँ कि उनका स्वभाव अत्यंत सौम्य है और गुरुजनों के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा है। 34. | mahabharat अध्याय 13.188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्मराज युधिष्ठिर का हृदय अत्यंत पवित्र है। वे सदैव आपकी आज्ञा में रहेंगे। मैं जानता हूँ कि उनका स्वभाव अत्यंत सौम्य है और गुरुजनों के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा है। 34.
Dharmaraj Yudhishthira's heart is very pure. He will always remain under your command. I know that his nature is very gentle and he has great devotion towards his teachers. 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥