Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.188.32: हे कुरुपुत्र! तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए। जो कुछ हुआ है, वह अवश्यंभावी था। तुमने श्रीकृष्ण-द्वैपायन व्यास से देवताओं का रहस्य भी सुना है (उसी के अनुसार महाभारत युद्ध की सारी घटनाएँ घटित हुई हैं)।   |   mahabharat अध्याय 13.188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.188.32 
न शोचितव्यं कौरव्य भवितव्यं हि तत् तथा।
श्रुतं देवरहस्यं ते कृष्णद्वैपायनादपि॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए। जो कुछ हुआ है, वह अवश्यंभावी था। तुमने श्रीकृष्ण-द्वैपायन व्यास से देवताओं का रहस्य भी सुना है (उसी के अनुसार महाभारत युद्ध की सारी घटनाएँ घटित हुई हैं)।
 
O son of Kuru! You should not grieve. Whatever has happened was inevitable. You have also heard the secret of the gods from Shri Krishna-Dwaipayana Vyasa (according to that all the events of the Mahabharata war have happened).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)