Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.188.16: हे शत्रुराज! कुन्तीकुमार ने सबसे पहले अपने पितामह को प्रणाम किया। तत्पश्चात् व्यासजी आदि ब्राह्मणों को भी सिर झुकाकर प्रणाम किया। फिर उन सबने भी उन्हें नमस्कार किया॥16॥   |   mahabharat अध्याय 13.188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.188.16 
अभिवाद्याथ कौन्तेय: पितामहमरिंदम।
द्वैपायनादीन् विप्रांश्च तैश्च प्रत्यभिनन्दित:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुराज! कुन्तीकुमार ने सबसे पहले अपने पितामह को प्रणाम किया। तत्पश्चात् व्यासजी आदि ब्राह्मणों को भी सिर झुकाकर प्रणाम किया। फिर उन सबने भी उन्हें नमस्कार किया॥16॥
 
O King of enemies! Kuntikumar first of all bowed to his grandfather. After that he bowed his head to Vyasa and other Brahmins. Then all of them also greeted him.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)