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mahabharat 13.187.16-17: राजन! वे महाकौरुण युधिष्ठिर, राजा धृतराष्ट्र और पतिव्रता पत्नी गान्धारीदेवी को आगे करके, समस्त ऋषियों, भाइयों, श्रीकृष्ण, नगर और जनपद के लोगों तथा वरिष्ठ मन्त्रियों के साथ हस्तिनापुर में प्रविष्ट हुए॥16-17॥   |   mahabharat अध्याय 13.187: भीष्मकी अनुमति पाकर युधिष्ठिरका सपरिवार हस्तिनापुरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 187: भीष्मकी अनुमति पाकर युधिष्ठिरका सपरिवार हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  13.187.16-17 
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य गान्धारीं च पतिव्रताम्।
सह तैर्ऋषिभि: सर्वैर्भ्रातृभि: केशवेन च॥ १६॥
पौरजानपदैश्चैव मन्त्रिवृद्धैश्च पार्थिव।
प्रविवेश कुरुश्रेष्ठ: पुरं वारणसाह्वयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजन! वे महाकौरुण युधिष्ठिर, राजा धृतराष्ट्र और पतिव्रता पत्नी गान्धारीदेवी को आगे करके, समस्त ऋषियों, भाइयों, श्रीकृष्ण, नगर और जनपद के लोगों तथा वरिष्ठ मन्त्रियों के साथ हस्तिनापुर में प्रविष्ट हुए॥16-17॥
 
Rajan! That great Kurus, Yudhishthira, leading King Dhritarashtra and devoted wife Gandhari Devi, entered Hastinapur along with all the sages, brothers, Shri Krishna, the people of the city and district and the senior ministers. 16-17॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि भीष्मानुज्ञायां षट्षष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें भीष्मकी अनुमतिविषयक एक सौ छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६६॥

 
 
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