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mahabharat 13.187.10: राजन! राजा ययाति की तरह भक्ति और संयम से तुम्हें बहुत से अन्न और यथोचित हविओं का प्रयोग करते हुए नाना प्रकार के यज्ञ करने चाहिए॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 13.187: भीष्मकी अनुमति पाकर युधिष्ठिरका सपरिवार हस्तिनापुरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 187: भीष्मकी अनुमति पाकर युधिष्ठिरका सपरिवार हस्तिनापुरको प्रस्थान  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.187.10 
यजस्व विविधैर्यज्ञैर्बह्वन्नै: स्वाप्तदक्षिणै:।
ययातिरिव राजेन्द्र श्रद्धादमपुर:सर:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजन! राजा ययाति की तरह भक्ति और संयम से तुम्हें बहुत से अन्न और यथोचित हविओं का प्रयोग करते हुए नाना प्रकार के यज्ञ करने चाहिए॥ 10॥
 
King! Like King Yayati, with devotion and self-control, you should perform various types of sacrifices using lots of food and adequate offerings.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)