Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.186.62: उनका स्मरण करने से मुझ पर कोई विघ्न न आए, मैं कोई पाप न करूं। चोर-डाकू मुझ पर पकड़ न बना सकें। इस लोक में मुझे सदैव स्थायी विजय प्राप्त हो और परलोक में भी मुझे उत्तम गति प्राप्त हो। ॥62॥ | mahabharat अध्याय 13.186: नित्यस्मरणीय देवता, नदी, पर्वत, ऋषि और राजाओंके नाम-कीर्तनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा विघ्नं मा च मे पापं मा च मे परिपन्थिन:।
ध्रुवो जयो मे नित्य: स्यात् परत्र च शुभा गति:॥ ६२॥
अनुवाद
उनका स्मरण करने से मुझ पर कोई विघ्न न आए, मैं कोई पाप न करूं। चोर-डाकू मुझ पर पकड़ न बना सकें। इस लोक में मुझे सदैव स्थायी विजय प्राप्त हो और परलोक में भी मुझे उत्तम गति प्राप्त हो। ॥62॥
By remembering them, may I not be attacked by any obstacle, may I not commit any sin. May thieves and robbers not have any hold on me. May I always get permanent victory in this world and may I get a good destination in the next world too. ॥ 62॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि वंशानुकीर्तनं नाम पञ्चषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें देवता आदिके वंशका वर्णन नामक एक सौ पैंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥