श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 186: नित्यस्मरणीय देवता, नदी, पर्वत, ऋषि और राजाओंके नाम-कीर्तनका माहात्म्य  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  13.186.37-38 
यवक्रीतोऽथ रैभ्यश्च कक्षीवानौशिजस्तथा॥ ३७॥
भृग्वङ्गिरास्तथा कण्वो मेधातिथिरथ प्रभु:।
बर्ही च गुणसम्पन्न: प्राचीं दिशमुपाश्रिता:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
यवकृत, रैभ्य, कक्षीवान, औशिज, भृगु, अंगिरा, कण्व, प्रभावशाली मेधातिथि और सर्वगुण संपन्न बर्हि- ये पूर्व दिशा में रहते हैं। 37-38॥
 
Yavakrit, Raibhya, Kakshivan, Aushija, Bhrigu, Angira, Kanva, the influential Medhatithi and the all-virtuous Barhi—they live in the east direction. 37-38॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas