श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 185: भीष्मका शुभाशुभ कर्मोंको ही सुख-दु:खकी प्राप्तिमें कारण बताते हुए धर्मके अनुष्ठानपर जोर देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.185.8 
कार्यावेतौ हि धर्मेण धर्मो हि विजयावह:।
त्रयाणामपि लोकानामालोक: कारणं भवेत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पवित्रता और पाप के स्पर्श का अभाव - ये दोनों ही धर्म के कार्य हैं। धर्म विजय दिलाता है और तीनों लोकों में प्रकाश फैलाता है। वही इस जगत की रक्षा का कारण है। 8॥
 
Purity and absence of the touch of sin – both these are the functions of religion. Religion brings victory and spreads light in all three worlds. He is the reason for the protection of this world. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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