Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.185.5: जो अपार ऐश्वर्य के स्वामी हैं, वे यह सोचकर कि कहीं हम रजोगुणी होकर पुनः जन्म-मरण के चक्र में न पड़ जाएँ, धर्म का पालन करते हैं और इस प्रकार अपने ही प्रयत्नों से आत्मा को महान पद की प्राप्ति कराते हैं ॥5॥ | mahabharat अध्याय 13.185: भीष्मका शुभाशुभ कर्मोंको ही सुख-दु:खकी प्राप्तिमें कारण बताते हुए धर्मके अनुष्ठानपर जोर देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा ह्युपस्थितैश्वर्या: प्रजायन्ते न राजसा:।
एवमेवात्मनाऽऽत्मानं पूजयन्तीह धार्मिका:॥ ५॥
अनुवाद
जो अपार ऐश्वर्य के स्वामी हैं, वे यह सोचकर कि कहीं हम रजोगुणी होकर पुनः जन्म-मरण के चक्र में न पड़ जाएँ, धर्म का पालन करते हैं और इस प्रकार अपने ही प्रयत्नों से आत्मा को महान पद की प्राप्ति कराते हैं ॥5॥
Those who are possessors of immeasurable opulence, thinking that they might again fall into the cycle of birth and death by becoming in the mode of passion, perform the duties of religion and thus by their own efforts make the soul attain a great position. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥