श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 185: भीष्मका शुभाशुभ कर्मोंको ही सुख-दु:खकी प्राप्तिमें कारण बताते हुए धर्मके अनुष्ठानपर जोर देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.185.4 
एतावन्मात्रमेतद्धि भूतानां प्राज्ञलक्षणम्।
कालयुक्तोऽप्युभयविच्छेषं युक्तं समाचरेत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य की बुद्धिमानी का लक्षण यह है कि वह धर्म के फल में विश्वास रखता है और उसका पालन करने लगता है। कर्तव्य और अकर्तव्य दोनों का ज्ञान रखने वाले व्यक्ति को प्रतिकूल प्रारब्ध होने पर भी उचित धर्म का पालन करना चाहिए। ॥4॥
 
The sign of intelligence in a person is that he believes in the fruits of Dharma and starts following it. A person who has knowledge of both duty and non-duty should follow the appropriate Dharma even if he is facing adverse destiny. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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