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श्लोक 13.185.2  |
काल एव सर्वकाले निग्रहानुग्रहौ ददत्।
बुद्धिमाविश्य भूतानां धर्माधर्मौ प्रवर्तते॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| काल सदैव संयम और कृपापूर्वक जीवों की बुद्धि में प्रवेश करता है और धर्म-अधर्म का फल देता है ॥2॥ |
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| Time, always exercising restraint and grace, enters the intellect of living beings and gives the results of righteousness and evil. ॥2॥ |
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