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mahabharat 13.185.2: काल सदैव संयम और कृपापूर्वक जीवों की बुद्धि में प्रवेश करता है और धर्म-अधर्म का फल देता है ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 13.185: भीष्मका शुभाशुभ कर्मोंको ही सुख-दु:खकी प्राप्तिमें कारण बताते हुए धर्मके अनुष्ठानपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 185: भीष्मका शुभाशुभ कर्मोंको ही सुख-दु:खकी प्राप्तिमें कारण बताते हुए धर्मके अनुष्ठानपर जोर देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.185.2 
काल एव सर्वकाले निग्रहानुग्रहौ ददत्।
बुद्धिमाविश्य भूतानां धर्माधर्मौ प्रवर्तते॥ २॥
 
 
अनुवाद
काल सदैव संयम और कृपापूर्वक जीवों की बुद्धि में प्रवेश करता है और धर्म-अधर्म का फल देता है ॥2॥
 
Time, always exercising restraint and grace, enters the intellect of living beings and gives the results of righteousness and evil. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)