श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 185: भीष्मका शुभाशुभ कर्मोंको ही सुख-दु:खकी प्राप्तिमें कारण बताते हुए धर्मके अनुष्ठानपर जोर देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.185.14 
सर्वेषां तुल्यदेहानां सर्वेषां सदृशात्मनाम्।
कालो धर्मेण संयुक्त: शेष एव स्वयं गुरु:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
सब मनुष्यों का शरीर एक ही है और उनकी आत्मा भी एक ही है; परन्तु यहाँ केवल धर्माधारित संकल्प ही रहता है, अन्य कुछ नहीं। वह स्वयं गुरु है, अर्थात् धर्म के बल से स्वयं ही उत्पन्न होता है॥14॥
 
All human beings have the same body and their souls are also the same; but only the resolution based on Dharma remains here, nothing else. It is itself a Guru, i.e. it arises on its own by the power of Dharma.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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