श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 185: भीष्मका शुभाशुभ कर्मोंको ही सुख-दु:खकी प्राप्तिमें कारण बताते हुए धर्मके अनुष्ठानपर जोर देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.185.1 
भीष्म उवाच
कार्यते यच्च क्रियते सच्चासच्च कृताकृतम्।
तत्राश्वसीत सत्कृत्वा असत्कृत्वा न विश्वसेत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "बेटा! मनुष्य जितने भी अच्छे-बुरे कर्म करता है या करवाता है, उनमें से अच्छे कर्म को करके उसे यह विश्वास रखना चाहिए कि उसका अच्छा फल मिलेगा; किन्तु बुरे कर्म को करके उसे यह विश्वास नहीं रखना चाहिए कि उसका कोई अच्छा फल मिलेगा ॥1॥
 
Bhishma said, "Son! Of all the good and bad deeds that a man performs or gets performed, by performing a good deed he should be assured that he will get good results from it; but by performing a bad deed he should not believe that he will get any good results. ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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